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  • स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का इससे अच्छा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा

    स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का इससे अच्छा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा

    भारत के बहुत सारे  परिवारों में माता पिता चाहते है कि उनका बच्चा उच्च शिक्षा हासिल करें। लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि वह उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को किस देश में भेजे। अगर आप भी अपने बच्चों कोे उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजना चाहते है तो  स्विट्जरलैंड बेहतर अॉप्शन है। स्विट्जरलैंड मध्य यूरोप का एक खूबसूरत देश है। इसकी 60 प्रतिशत सरजमीन ऐल्प्स पहाड़ों से ढकी हुई हैं। इसलिए इस देश में बहुत ही खूबसूरत पर्वत, गांव, झील और चारागाह हैं। इतना ही नहीं स्विस लोगों का जीवनस्तर भी दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। हाई क्वालिटी एजुकेशन के कारण भारतीय स्टूडेंट्स भी अब इस देश का रुख करने लगे हैं। खासकर, स्विट्जरलैंड को होटेल मैनेजमेंट और ट्रैवल कोर्सेज के लिए बेहतर स्टडी डेस्टिनेशन माना जाता है।

    स्विट्जरलैंड के बारे मे
    इस देश में तीन राजभाषाएं हैं  जर्मन (उत्तरी और मध्य भाग की मुख्य भाषा), फ्रांसिसी (पश्चिमी भाग) और इतालवी (दक्षिणी भाग), और एक सह-राजभाषा है: रोमांश (पूर्वी भाग)। इसके प्रांत कैण्टन कहे जाते हैं। स्विट्जरलैंड एक लोकतंत्र है। यहां आज भी प्रत्यक्ष लोकतंत्र देखने को मिल सकता है। लगभग 20 फीसदी स्विस लोग विदेशी मूल के हैं। इसके मुख्य शहर और पर्यटक स्थल हैं ज़्यूरिख, जनीवा, बर्न (राजधानी), बासल, इंटरलाकेन, लोजान, लूत्सर्न, इत्यादि।

    किस तरह के कोर्स
    यहां सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, अंडरग्रेजुएट या बैचलर डिग्री प्रोग्राम जैसे विभिन्न स्तर के कोर्स चलाए जाते हैं। इसके अलावा, वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत ग्रेजुएट डिप्लोमा दिया जाता है जो कि किसी स्पेसिफिक प्रोफेशन को अपनाने के लिए होता है। एडवांस टेक्निकल कॉलेज, कॉमर्शियल एंड मैंनेजमेंट कॉलेज समेत अन्य सात कॉलेजों में 250 प्रोग्राम चलाए जाते हैं। हर साल लगभग 1800 स्टूडेंट्स टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, इकोनॉमिक एंड डिजाइन के कोर्स के लिए यहां आते हैं। सेमेस्टर सिस्टम में बंटे अधिकतर कोर्स अक्तूबर, नवंबर में शुरू होकर मई माह के अंत तक चलते हैं। यूरोपियन बिजनेस हब होने के नाते भी यहां पर लोकल स्तर पर भी बहुत से छोटे-छोटे बिजनेस कोर्स भी चलाए जाते हैं। इनमें बैंकिंग, मशीन टूल और पर्सियन इंजीनियरिंग, केमिकल और फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग, होटल मैंनेजमेट के साथ-साथ टूरिस्ट एजुकेशनल कोर्सेज की भी पढ़ाई कराई जाती है।

    आवेदन प्रक्रिया 
    यहां के शिक्षण संस्थानों में मास्टर डिग्री कोर्स में दाखिला लेने के लिए कम से कम एक साल पहले प्रक्रिया शुरू हो जाती है। आवेदन-पत्र विश्वविद्यालयों से संबंधित वेबसाइट और ई-मेल से प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अलावा, फॉरेन एजुकेशन सेंटर और एम्बेसीज से आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। आवेदन-पत्र के साथ छात्र को एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के अलावा, अंग्रेजी ज्ञान परीक्षा, कार्य अनुभव की जानकारी और अनुमोदन-पत्र के साथ शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य का भी जिक्र करना जरूरी होता है।

    वीजा प्रक्रिया
    स्विट्जरलैंड में किसी भी कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला लेने के लिए स्टूडेंट्स को वीजा की जरूरत पड़ती है। इसीलिए ऐप्लिकेशन फॉर्म अप्लाई करने के 6 या 8 हफ्ते पहले ही वीजा के लिए भी अप्लाई कर दें। आवेदन-पत्र के साथ वैध पासपोर्ट, जन्मतिथि प्रमाण-पत्र, विश्वविद्यालय का स्वीकृति पत्र, भाषा ज्ञान, फ्यूचर प्लान लैटर आदि के अलावा बैंक डॉफ्ट जमा करना होता है। वीजा से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप स्विस एजुकेशन सेंटर से भी संपर्क कर सकते हैं

    फीस और खर्च
    स्विट्जरलैंड के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में फीस एक जैसी नहीं है। कुछ संस्थान और यूनिवर्सिटीज फॉरेन स्टूडेंट्स से एक्स्ट्रा फीस भी वसूलती हैं। अगर यहां के फीस खर्च को आंका जाए तो कम से कम 60,000 और ज्यादा से ज्यादा 200,000 स्विस फ्रेंक का खर्च पढ़ाई में आता है। इसके अलावा, रहने और खाने का मंथली खर्च 1000 से 1500 स्विस फ्रेंक तक हो सकता है।

    स्कॉलरशिप
    यदि आप फीस देने में असमर्थ हैं. तो स्कॉलरशिप के माध्यम स्विट्जरलैंड में पढऩे का सपना पूरा कर सकते हैं। यहां के कुछ प्रमुख विदेशी स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप प्रदान करती है। ज्यादातर स्कॉलरशिप फॉरेन गवर्नमेंट द्वारा प्रदान की जाती है, जबकि प्राइवेट फाउंडेशन अपनी शर्तों पर ही स्कॉलरशिप देती हैं। इसके अलावा, आप बहुत-सी स्विस यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट्स से भी स्कॉलरशिप की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। स्कॉलरशिप के लिए फेडरल कमिश्नर फॉर स्कॉलरशिप वेबसाइट पर जाकर सर्च कर सकते हैं।

    जॉब के मौके
    कुछ देश स्टूडेंट्स को बिना वर्क परमिट के पार्टटाइम काम करने की अनुमति नहीं देते हैं, जबकि यहां पर स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ पार्टटाइम जॉब भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं, जो स्टूडेंट्स पढ़ाई खत्म करने के बाद यहां पर जॉब अवसर तलाशते हैं उनके लिए संस्थान और विश्वविद्यालय इस तरह के ऑप्शन बचा कर रखते हैं। इसके अतिरिक्त शॉर्ट टर्म जॉब में रेस्टोरेंट वर्क, टेम्पिंग, चाइल्ड केयर, फार्म वर्क जैसी जॉब से भी स्टूडेंट्स अपना जेब खर्च आसानी से निकाल लेते हैं।

     जेनेवा बिजनेस स्कुल 

    यह वहा का नामी कालेज है यहाँ पर नाममात्र के शुल्क पर MBA एवं DBA ( डाक्टरेट ) कोर्स उपलब्ध है. इन कोर्स में प्रवेश हेतु आवेदक को किसी भी तरह की प्रवेश परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है.

  • भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति पर एमओयू ‘ऐतिहासिक‘ : मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर

    भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति पर एमओयू ‘ऐतिहासिक‘ : मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर

     

    MOU

    भारत और फ्रांस के बीच मजबूत एवं दीर्घकालिक संबंधों को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दोनों देशों के बीच ‘शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति‘ पर समझौता ज्ञापन को ‘ऐतिहासिक‘ करार दिया है।

    उन्होंने नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय भवन में नॉलेज शिखर सम्मेलन में फ्रांस की उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं नवोन्मेषण मंत्री श्रीमती फ्रेडरिक विडाल की उपस्थिति में कहा ‘ यह ऐतिहासिक है। पहली बार ‘शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह छात्र समुदाय की सहायता करेगा। पहले केवल दो संस्थानों के बीच में ही द्विपक्षीय समझौते हुआ करते थे। ‘

    श्री जावड़ेकर ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि फ्रांस की तरह अधिक से अधिक देश शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति के लिए सामने आएंगे जिससे कि छात्रों एवं पेशेवर व्यक्तियों की गतिशीलता में सुधार हो सके।‘

    पहली भारत और फ्रांस उच्च स्तरीय नॉलेज शिखर सम्मेलन, 2018 का आयोजन फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं नवोन्मेषण मंत्रालय (एमईएसआरआई) एवं भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ साथ भारत में फ्रांस के संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।

    इसकी जानकारी देते हुए कि फ्रांस में 5000 से अधिक भारतीय छात्र और भारत में फ्रांस के लगभग 1500 छात्र अध्ययन कर रहे हैं, मंत्री महोदय ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय अन्य देशों से भारत में अधिक से अधिक छात्रों को आकर्षित करने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया‘ पहल आरंभ करेगा।

    भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक योग्यताओं की परस्पर स्वीकृति पर समझौता ज्ञापन के अतिरिक्त, उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवोन्मेषण, संकाय विनिमय वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के विभिन्न संस्थानों के बीच लगभग 15 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

    मंत्री महोदय ने इस अवसर पर भारत सरकार द्वारा नवोन्मेषण, अनुसंधान एवं भारत में शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए ‘इंप्रिंट‘, ‘ज्ञान‘, ‘स्वयम‘ एवं पीएमआरएफ जैसी विभिन्न पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान‘, एक ऐसी पहल है जिसमें विदेशी संकाय भारत का भ्रमण करते हैं और कुछ विशिष्ट उच्च शिक्षा संस्थानों में भारतीय छात्रों के अनुकूल पाठ्यक्रमों का संचालन करते हैं। इसके तहत, पिछले वर्ष फ्रांस के लगभग 30 संकाय सदस्यों ने पाठ्यक्रमों का संचालन करने के लिए भारत का दौरा किया था और इस संख्या में और बढोतरी होने की उम्मीद है।

    भारत के अपने एमओओसी ‘स्वयम‘ के तहत, 700 से भी अधिक पाठ्यक्रम पहले ही आरंभ किए जा चुके हैं और लगभग 2 मिलियन छात्रों, संकायों एवं प्रोफेशनलों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए खुद का पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि ‘किसी एटीएम (एनी टाइम मनी) की तरह ‘स्वयम‘ एटीएल (एनी टाइम लर्निंग) और एडब्ल्यूएल (एनी व्हेयर लर्निंग) है।‘

    किसी देश की प्रगति में नवोन्मेषण एवं अनुसधान के महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री जावड़ेकर ने कहा कि उनका मंत्रालय अनुसंधान एवं नवोन्मेषण पर विशेष जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि ‘इंप्रिंट, जो नवोन्मेषण के 10 डोमेन अग्रिम क्षेत्रों में संकायों, छात्रों, प्रोफेशनलों एवं अन्य द्वारा नवोन्मेषण के लिए एक खुला आमंत्रण है, के तहत हाई-एंड अनुसंधान एवं नवोन्मेषण प्रस्तावों के वित्तपोषण के लिए 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    इसके अतिरिक्त, पीएमआरएफ के तहत प्रत्येक वर्ष लगभग 1000 छात्रों को प्रति महीने प्रति छात्र अत तक का सर्वाधिक 70 हजार रुपये से 80 हजार रुपये तक के छात्रवृत्ति की पेशकश की जाएगी। इन पहलों के अतिरिक्त, मंत्रालय ने पिछले वर्ष से स्मार्ट इंडिया हैकथन आरंभ किया है। पिछले वर्ष 2000 टेक्निकल एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों से कुल 42,000 छात्रों ने इसमें भाग लिया। इस वर्ष लगभग एक लाख छात्र पहले ही इसमें भाग ले चुके हैं।

    फ्रांस की उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं नवोन्मेषण मंत्री श्रीमती फ्रेडरिक विडाल ने कहा कि नॉलेज शिखर सम्मेलन 2020 तक फ्रांस में 10,000 छात्रों को आकर्षित करने के फ्रांस की सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। पिछले वर्ष, 5000 से अधिक भारतीय छात्रों ने फ्रांस को अध्ययन गंतव्य के रूप में चुना था जो पिछले वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक है।

    इस शिखर सम्मेलन में सहयोग के लिए सात प्राथमिकता क्षेत्रों की खोज की गई है: अंतरिक्ष एवं वैमानिकी, गणित एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पारिस्थितिकी-ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन एवं जैव सक्रिय यौगिक, वास्तु कला एवं शहरी नियोजन और शहरी गतिशीलता।

  • इंदौर शहर में पहली बार चेक रिपब्लिक, यूरोप में उच्च शिक्षा के बारे में वहा के विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क सेमीनार

    इंदौर शहर में पहली बार चेक रिपब्लिक, यूरोप में उच्च शिक्षा के बारे में वहा के विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क सेमीनार

    चेक रिपब्लिक में उच्च शिक्षा के अवसर

    यदि आपके मन में भी अपने बच्चो को बाहर किसी देश में पढ़ाने की इच्छा हैं लेकिन उसमे होने वाले खर्चे से भयभीत हैं तो घबराइये नहीं . हममें से बहुत सारे लोग विदेश जाकर पढ़ने की चाहत रखते है । लेकिन उनमें से बहुत ही कम लोगों को विदेश जाकर पढ़ने का मौका मिल पाता है । ज्यादातर लोग पैसों की तंगी के कारण विदेश जाकर पढ़ने के अपने सपने को पूरा नहीं कर पाते , लेकिन अगर आपको पता चले कि कुछ देश ऐसे भी है जहां कम बजट में एजुकेशन दी जाती है तो शायद ही आप यकीन करेंगे। लेकिन यह सच है दुनिया में कई देश ऐसे है जहां मुफ्त या बेहद कम खर्चे पर में उच्च शिक्षा दी जाती है । चेक रिपब्लिक उन्ही देशो में से एक है. आपको इन देशों की एजुकेशन पॉलिसी और दाखिले के लिए शर्तों को समझना होगा और इस हिसाब से ही तैयारी कर आगे और समय पर सही तैयारी के साथ अप्लाई करें। इसके लिए चेक रिपब्लिक से वहा के उच्च शिक्षा के विद्वान् श्री ओन्द्रेज 23 अक्टूम्बर 2017 को इंदौर आ रहे है.
    इस सम्बन्ध में हमारा सभी छात्रो से निवेदन है कि उपरोक्त कार्यक्रम में सम्मिलित होकर चेक रिपब्लिक में उच्च शिक्षा के बारे में सही एवं सटीक जानकारी लेकर अपने कम बजट में विदेश जाने के अवसर प्राप्त कर सकते है.
    कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी के लिए हमारे नंबर भी संपर्क कर सकते है

  • पोलैंड में शिक्षा प्राप्त करना काफी आसान है

    पोलैंड आज पूर्वी यूरोप में सर्वश्रेष्ठ देश में से एक माना जाता है. इस देश में माध्यमिक और उच्च शिक्षा कि विशेषताएं :-

     पोलैंड – शिक्षा प्रणाली
    इस पूर्वी यूरोपीय देश, जो रूस की सीमाओं, बेलोरूस, लिथुआनिया, जर्मनी, यूक्रेन, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के पास है . पोलैंड, यूरोपीय संघ का एक पूर्ण सदस्य है, यहाँ की शिक्षा उच्च मानकों को पूरा करती है. पोलिश डिप्लोमा एक अखिल यूरोपीय डिप्लोमा माना जाता है. क्यों कि पोलिश माध्यमिक या उच्च शिक्षा प्राप्त स्टूडेंट पुरे यूरोप में कही भी जॉब कर सकता है.

     

     

    अपनी भौगोलिक व सांस्कृतिक विशेषताओं के बल पर विदेशियों  को आकर्षित करने में सक्षम पोलैंड का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। यूरोप के केंद्र में बसे पोलैंड का क्षेत्रफल 120,726 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 3.85 करोड़ से ज्यादा है। पोलैंड में उच्च शिक्षा के 470 संस्थान हैं। इनमें से 130 यूनिवर्सिटीज और सरकारी संस्थान हैं। वर्ष 1999 में पोलैंड ने शिक्षा में बोलोन प्रॉसेस को अपनाया, जिसके तहत अब वहां तीन साल के बैचलर और दो वर्ष के मास्टर्स प्रोग्राम को मिला कर एम.ए. की डिग्री दी जाती है। हालांकि सभी विषयों के साथ ऐसा नहीं है।

    संस्थान और डिग्री कोर्स
    पोलैंड के उच्च शैक्षणिक नियमों के तहत सरकारी और निजी, दोनों ही संस्थानों में उच्च शिक्षा की छूट है। उच्च शैक्षणिक संस्थानों के दो मुख्य क्षेत्र हैं: यूनिवर्सिटी टाइप और नॉन-यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूशंस, जहां कम से कम एक विषय में डॉक्टरेट से संबंधित पाठ्यक्रम होता है।

    स्कॉलरशिप के लिए
    वे सभी अंतरराष्ट्रीय छात्र यहां स्कॉलरशिप के लिए एप्लाई कर सकते हैं, जिनके देश और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत इससे संबंधित कुछ नियम बनाए गए हों, लेकिन भारतीय छात्रों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है।

    फीस
    निजी संस्थानों में फुलटाइम उच्च शैक्षणिक कोर्स मुफ्त किए जा सकते हैं। हालांकि इस नियम के दो अपवाद भी हैं-
    1. अगर पहली बार में छात्र संतोषप्रद रिजल्ट नहीं देता तो दूसरी बार उस कोर्स के लिए उसे फीस जमा करानी पड़ सकती है।
    2. आवेदन करने वाले छात्रों को प्रशासनिक फीस अवश्य देनी होती है, जो किसी भी संस्थान द्वारा पहले से ही तय होता है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय द्वारा तय वार्षिक राशि से ज्यादा फीस संस्थान नहीं रख सकता।
    3. ज्यादातर सरकारी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में पार्ट-टाइम कोर्सेज हेतु एक निश्चित फीस तय की जाती है। सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों में ट्यूशन फीस अलग-अलग हैं।

    वर्क परमिट
    पोलैंड में फुलटाइम कोर्स कर रहे विदेशी छात्रों को जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में जॉब करने की इजाजत है, जबकि अन्य महीनों में काम करने के लिए वर्क परमिट की जरूरत होती है। स्टूडेंट वीजा की बदौलत विदेशी छात्रों को यहां जॉब की इजाजत नहीं है। इसके लिए उन्हें रेजिडेंट वीजा लेना होता है। विदेशी छात्रों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस जरूरी है।

    एकेडमिक ईयर
    पोलिश यूनिवर्सिटीज में अमूमन एकेडमिक ईयर 15-15 हफ्ते के दो सेमेस्टर में बंटे होते हैं। अक्तूबर से शुरू होने वाला सेमेस्टर मिड फरवरी तक चलता है, जबकि फरवरी से शुरू होने वाला जून अंत तक।

    पोलिश भाषा के लिए
    यहां कई विषयों की शिक्षा अंग्रेजी में दी जाती है, इसलिए जरूरी नहीं कि आपको पोलिश भाषा आनी ही चाहिए।

    वीजा
    विदेशी छात्रों को यहां शिक्षा के लिए पोलिश एंबेसी से वीजा की आवश्यकता होगी। यह वीजा अधिकतम तीन माह के लिए मान्य होगा। इससे ज्यादा समय तक वहां रहने के लिए वीजा एक्सपायर होने से 45 दिन पहले तक रेजिडेंट वीजा के लिए एप्लाई करना जरूरी है।

    कुछ डिग्री कोर्सेज
    पोलैंड में ‘लाइसेंसजैट’ के प्रोफेशनल टाइटल के लिए तीन से चार वर्ष वाला कोर्स करना होगा।

    इंजीनियिरग की डिग्री पाने के लिए साढ़े तीन से चार वर्ष का समय लग सकता है।
    मास्टर्स डिग्री के लिए यहां डेढ़ से दो साल तक के कोर्सेज करने होते हैं। इसके बाद आपको ‘मैजिस्टर’ या इसके समतुल्य डिग्री मिल पाएगी। ‘मैजिस्टर’ के कुछ कोर्सेज साढ़े चार या छह वर्ष वाले भी हैं।
    यूनिवर्सिटी-टाइप स्कूलों सहित कुछ रिसर्च स्कूलों में डॉक्टरल प्रोग्राम्स को भी जगह दी जाती है।

    नामांकन के लिए
    उच्चतम शैक्षणिक संस्थानों में डिग्री कोर्सेज के लिए आपके पास होने चाहिए-

    सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट या मैजिस्टर, लाइसेंसजैट, इंजीनियर या समतुल्य डिग्री।
    नामांकन की शर्ते और प्रक्रिया सहित किसी भी क्षेत्र में अध्ययन हेतु उच्च शैक्षणिक संस्थान के सीनेट का सहमति पत्र।
    फर्स्ट और लॉन्ग साइकिल प्रोग्राम्स में नामांकन हेतु सेकेंडरी स्कूल लीविंग एग्जामिनेशन रिजल्ट का साथ होना जरूरी है।
    भारतीय छात्रों को यहां उच्च शिक्षा हेतु नामांकन के लिए अवनि ओवरसीज़, इंदौर से संपर्क करना होगा।